नक्सलमुक्त भारत: ऐतिहासिक उपलब्धि
देश नक्सलमुक्त: कठोर निर्णयों और रणनीतिक कार्रवाई से ऐतिहासिक उपलब्धि
पटना से विशेष रिपोर्ट
पटना। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा कि भारत अब पूरी तरह नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है। छह दशक पुरानी इस गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौती के समाप्त होने पर उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को बधाई दी और पूरे देश, विशेषकर बिहार की जनता की ओर से आभार प्रकट किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सफलता किसी एक दिन का परिणाम नहीं, बल्कि वर्षों की सख्त नीतियों, ठोस निर्णयों और निरंतर अभियान का नतीजा है। 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलमुक्त बनाने का लक्ष्य अब पूरी तरह प्राप्त हो चुका है।
नक्सलवाद का अंत: राष्ट्रीय सुरक्षा में ऐतिहासिक मोड़
हम देखते हैं कि नक्सलवाद लंबे समय तक देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बना रहा। बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य इससे बुरी तरह प्रभावित थे।
प्रमुख तथ्य:
- बिहार के 23 से अधिक जिले नक्सल प्रभावित थे
- हजारों लोग हिंसा का शिकार हुए
- विकास परियोजनाएं बाधित रहीं
- प्रशासनिक पहुंच सीमित थी
आज यह स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।
2005 से पहले की भयावह स्थिति
हम उस दौर को याद करते हैं जब बिहार के कई जिलों में नक्सलियों का आतंक चरम पर था। जहानाबाद, गया, कैमूर और औरंगाबाद जैसे क्षेत्रों में प्रशासनिक उपस्थिति बेहद कमजोर थी।
उस समय की स्थिति:
- मुख्यमंत्री तक इन क्षेत्रों का दौरा करने से कतराते थे
- आम नागरिक भय और असुरक्षा में जीते थे
- सरकारी योजनाएं जमीन पर नहीं उतर पाती थीं
निर्णायक मोड़: सख्त नीतियां और समन्वित कार्रवाई
हम पाते हैं कि 2005 के बाद राज्य स्तर पर और 2014 के बाद केंद्र स्तर पर नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक रणनीति अपनाई गई।
प्रमुख कदम:
1. सुरक्षा बलों की सक्रिय तैनाती
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक अभियान चलाए गए।
2. आत्मसमर्पण नीति
नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने का अवसर दिया गया।
3. कठोर कानूनी कार्रवाई
जो नक्सली नहीं माने, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई।
4. विकास और बुनियादी ढांचा
सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया गया।
अंतिम सफलता: 18 फरवरी 2026 का ऐतिहासिक दिन
मुंगेर में अंतिम सशस्त्र माओवादी सुरेश कोड़ा के आत्मसमर्पण के साथ ही बिहार पूरी तरह नक्सलमुक्त घोषित हो गया।
इसके बाद:
- राज्य का कोई भी जिला नक्सल प्रभावित नहीं रहा
- सुरक्षा और विकास का संतुलन स्थापित हुआ
- आम जनता में विश्वास और स्थिरता बढ़ी
बिहार: लाल आतंक से विकास की ओर
हम स्पष्ट रूप से देख सकते हैं कि बिहार ने नक्सलवाद से बाहर निकलकर विकास की नई दिशा पकड़ी है।
वर्तमान उपलब्धियां:
- तेज़ी से बढ़ती बुनियादी सुविधाएं
- निवेश के नए अवसर
- कानून व्यवस्था में सुधार
- रोजगार के बढ़ते अवसर
केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त सफलता
यह उपलब्धि केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय का परिणाम है। स्पष्ट रणनीति, समयबद्ध लक्ष्य और मजबूत इच्छाशक्ति ने इसे संभव बनाया।
सफलता के प्रमुख स्तंभ:
- राजनीतिक इच्छाशक्ति
- प्रशासनिक दक्षता
- सुरक्षा रणनीति
- जनसहभागिता
निष्कर्ष: नया भारत, सुरक्षित भारत
हम इस ऐतिहासिक उपलब्धि को केवल सुरक्षा की जीत नहीं, बल्कि एक नए भारत की शुरुआत मानते हैं। नक्सलमुक्त भारत अब विकास, शांति और समृद्धि की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
बिहार सहित पूरे देश के लिए यह एक निर्णायक परिवर्तन है, जो आने वाले वर्षों में सामाजिक और आर्थिक प्रगति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।
