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पटना: SIR विवाद पर बिहार के सीएम सम्राट चौधरी का विपक्ष पर पलटवार!

बिहार में SIR विवाद: सीएम सम्राट चौधरी ने विपक्ष पर बोला जोरदार हमला, कहा- ‘एक भी नाम नहीं बता पाया विपक्ष’

पटना: चुनाव आयोग को लेकर देशभर में चल रहे सियासी बवाल के बीच बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को पटना में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी इंडिया गठबंधन पर तीखे शब्दों में पलटवार करते हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर लगाए जा रहे सभी आरोपों को पूरी तरह से निराधार करार दिया। उनकी यह प्रेस वार्ता ऐसे समय पर हुई जब मीडिया रिपोर्टों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच कथित मतभेदों की खबरें सामने आ चुकी हैं, जिसे विपक्ष ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को घेरने का एक बड़ा हथियार बना लिया है।

क्या है पूरा विवाद

बीते कुछ दिनों से देश की राजनीति में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर घमासान मचा हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक, SIR प्रक्रिया से जुड़े कुछ फैसलों पर चुनाव आयुक्तों ने आपस में असहमति जताई थी और औपचारिक रूप से अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इस खबर के सार्वजनिक होते ही कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष हमलावर हो गया। पार्टी का आरोप है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहा है और बिहार में हुई SIR प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची में जानबूझकर गड़बड़ी की गई, ताकि सत्तारूढ़ दल को चुनावी लाभ मिल सके। राहुल गांधी लगातार यह कहते आ रहे हैं कि देश में “वोट चोरी” हो रही है और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

इसी माहौल में भाजपा और एनडीए की ओर से भी लगातार जवाबी हमले किए जा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग के भीतरी कामकाज में सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं है और विपक्ष केवल राजनीतिक फायदे के लिए एक संवैधानिक संस्था को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। इसी कड़ी में अब खुद बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मैदान में उतर आए और उन्होंने विस्तार से अपनी सरकार का पक्ष रखा।

सम्राट चौधरी ने क्या-क्या कहा

प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ किया कि बिहार में SIR कोई नई प्रक्रिया नहीं है और इसे लेकर बेवजह हल्ला मचाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य में मौजूदा SIR की शुरुआत 24 जून 2025 से हुई थी और विधानसभा चुनाव से पहले ही यह प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कर ली गई। उन्होंने जोर देकर कहा कि पूरी कवायद के दौरान किसी भी स्तर पर कोई गड़बड़ी नहीं की गई।

मुख्यमंत्री ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि यह पहला मौका नहीं है जब बिहार में SIR की प्रक्रिया अपनाई गई हो। उनके मुताबिक, जब राबड़ी देवी बिहार की मुख्यमंत्री थीं, तब भी राज्य में इसी तरह मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण किया गया था। इससे पहले जब राज्य में कांग्रेस की सरकार हुआ करती थी, तब भी यह प्रक्रिया अपनाई जाती रही। सम्राट चौधरी ने तंज कसते हुए कहा कि उस दौर में किसी को इस प्रक्रिया पर कोई आपत्ति नहीं हुई, लेकिन अब जब एक “गरीब घर से आया व्यक्ति” यह जिम्मेदारी निभा रहा है, तो अचानक विपक्ष को इसमें खामियां नजर आने लगी हैं।

राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस नेता बार-बार यह दावा करते रहे हैं कि देश में लोकतंत्र खत्म हो चुका है, लेकिन जब भी उनसे तथ्यों और सबूतों के साथ बात करने को कहा जाता है, तो वे पीछे हट जाते हैं। उन्होंने कहा कि चाहे राज्य स्तर पर नेता प्रतिपक्ष हों या राष्ट्रीय स्तर पर, विपक्ष के पास तथ्यों के आधार पर बात करने के लिए कुछ नहीं है और सिर्फ हवा-हवाई आरोप लगाए जा रहे हैं। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक साधारण और गरीब परिवार से निकलकर देश के शीर्ष पद तक पहुंचने की कहानी ही विपक्ष के लिए असहनीय हो गई है, और यही वजह है कि विपक्ष हर मौके पर मोदी सरकार और उससे जुड़ी संस्थाओं को निशाना बनाने में जुटा रहता है।

मुख्यमंत्री ने SIR की प्रक्रिया को तकनीकी रूप से भी समझाने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि जब मतदाता सूची का प्रारंभिक ड्राफ्ट जारी किया गया था, उसके बाद आम नागरिकों के लिए एक विशेष विंडो खोली गई थी, ताकि जिन लोगों के नाम छूट गए हों या जिनमें कोई त्रुटि हो, वे आवेदन देकर सुधार करवा सकें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2003 के SIR में जिन नागरिकों के नाम पहले से दर्ज हैं, उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा है।

इसके अलावा मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के युवा नेताओं पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने राघोपुर क्षेत्र के कुछ लोगों को दिल्ली बुलाकर उनके साथ रात्रिभोज का आयोजन किया, जबकि हकीकत में कांग्रेस और राजद के “युवराज” बिहार में सिर्फ घूमने-फिरने और पर्यटन जैसी गतिविधियों में व्यस्त रहे, न कि जमीनी स्तर पर जनता की वास्तविक समस्याओं को समझने में।

अपनी बात को आंकड़ों के जरिए पुख्ता करते हुए सम्राट चौधरी ने दावा किया कि पूरी SIR प्रक्रिया के दौरान करीब सात लाख ऐसे मतदाताओं की पहचान की गई, जिनका नाम गलती से दो अलग-अलग स्थानों की मतदाता सूची में दर्ज था। उन्होंने कहा कि ऐसे सभी मामलों में केवल डुप्लीकेट यानी दोहरी प्रविष्टियों को ही हटाया गया, न कि किसी वास्तविक और वैध मतदाता का नाम काटा गया। मुख्यमंत्री ने विपक्ष को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया के दौरान विपक्ष आज तक एक भी ऐसे व्यक्ति का नाम सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं ला सका, जो वास्तव में बिहार का निवासी और वैध मतदाता हो, और जिसका नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटा दिया गया हो।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे की राह

गौरतलब है कि सम्राट चौधरी अप्रैल 2026 में बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले भारतीय जनता पार्टी के पहले नेता बने थे। इससे पहले वे नीतीश कुमार सरकार में उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके थे। बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद से ही सम्राट चौधरी लगातार विपक्ष पर हमलावर रुख अपनाए हुए हैं और कई मौकों पर राहुल गांधी तथा राजद नेता तेजस्वी यादव को निशाने पर ले चुके हैं।

यह भी उल्लेखनीय है कि हाल के दिनों में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जमुई में हुई एक घटना को लेकर भी अपनी टिप्पणियों के चलते विवादों में घिरे रहे हैं, जिसकी वजह से कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर भी उनकी सरकार की काफी आलोचना हुई थी। ऐसे में यह प्रेस कॉन्फ्रेंस राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में सरकार की छवि को दुरुस्त करने और विपक्ष के हमलों का माकूल जवाब देने की एक रणनीतिक कोशिश के तौर पर भी देखी जा रही है।

फिलहाल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की ओर से मुख्यमंत्री के इन बयानों पर औपचारिक प्रतिक्रिया आना अभी बाकी है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह तय माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाएगा। चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों को लेकर चल रही बहस और बिहार में SIR प्रक्रिया की निष्पक्षता पर उठ रहे सवाल आगामी सत्रों में संसद के भीतर और बाहर, दोनों जगह विपक्ष के प्रमुख हथियार बने रहने की संभावना है।

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